Hi frnds !
Time for Change
कभी आपने सोचा है कि आप जिस भगवन कि पूजा करते है उनकी आज क्या मान्यता रह गई है ....
आप में से सभी भगवान उस परमपिता परमेश्वेर को अलग अलग रुपौ में मानते है..कोई साईं-साईं करता होगा , तो कोई राधे शाम.....कोई जय भोलेनाथ का नारा लगा होगा तो कोई राम के महिमा गाते hoga ,,,,,,,,,,,,
हम सभी भगवान को इतना ज्यादा मानने लगे कि कि उनके प्रतिरूप छवि को हम शादी के निमंत्रण पत्रों पर, विसिटिंग कार्ड्स पर , घर के बहार दीवारों पर बहुत ख़ुशी और श्रदा से लगते है ....
हम में से ही कुछ व्यापारी इन्हें अपने products के कवर पेज पर ही बिठा देते है ...जैसे हरिदर्शन धुप , लक्ष्मी इन्सेंस , साईं अगरबत्ती , ब्लिस सुप्रीम , स्वर्ण गणेशा , साईं गीता ......[ you can see there Covers along with the same mail ] और हम इन products को use कर के इनके खाली लिफोफो को कचरे के डिब्बो में डाल देते है.....शादी के कार्ड कुछ समय बात घर के बाहर कचरे के ढेर कि शोभा बन जाते है..विसिटिंग कार्ड पुराने हो जाते है तो हम कूड़ेदान में डाल देते है ...
तो क्या आप को अब भी लगता है हमे इश्वर को इस हद तक मानना चाइये कि हमारी श्रद्धा ही उन्हें कचरों के ढेरो और हमारे कदमो के निचे दबने पर मजबूर कर दे...
इस मेल के जरिये में जागरण को और जागरण के सभी पाठको को अपनी इस सोच से अवगत करना चाहती हूँ ताकि इस विषय को सभी जान सके और गलत advertisements के विरोध में एक आवाज़ उठाये ....ताकि लोग advertisement के लिए भगवान का use बंद करे या इस प्रकार के advertisement को एक लिमिटेड दायरा दिया जाये ताकि बार बार इस अपमान को होने से रोका जा सके....आज के टाइम में हर कोई इतना पढ़ा लिखा है कि वो कंपनी का नाम पड़ सकता है लिफाफों पर , यहा कोई भी केवल चित्र देख कर सामान नहीं खरीदता ....मेने बहुत से दीवारों के उपर टायल्स में भगवान के फोटोस देखे है और साथ ही ये भी देखा है कि आते जाते आदमी उन्ही के उपर और उन्ही के पास टोइलेट करना शुरू का देते है ......तो क्या आपने इसी लिए वो टायल्स लगवाई है ...आपकी कोई पुरानी दुश्मनी है क्या भगवान से ......
इसके साथ ही मेरी एक प्राथना सभी समाचारपत्रों के प्रबंधोको से भी है कि हर छोटे बड़े article के साथ व्यर्थ ही भगवान कि प्रतिमा को लगाने कि मंजोरी देते है , कृपया कर इस मंजोरी को रोक कर और एक दायरे में रख कर उस भगवान अपमान होने से रोके....ये हम सभी जानते है समाचार पत्र एक दिन पुराना होते ही कचरा बन जाता है , फिर क्यों हम सभी एक छोटे से शो बड़ाने के लिय उपर वाले का अपमान करते है...अरे मानो तो ढंग से मानो और कुछ कर के दिखाओ वरना ऊपर वालो को उसके हाल पर छोड़ दू , अगर उसकी इज्जत नी कर सकते तो अपमान करने का हक भी आपको नहीं है..
अंत में मै बस ये कहाँ चाहूंगी ये मेरा एक प्रयास है , मेरी एक श्रधा है पर ये केवल मेरे मान ने से ख़तम नी होगी... हम सभी को इस बारे में सोचना होगा ताकि इश्वर को रोड पर आने से रोका जा सके , उनकी जगह सिफ्र हमारे दिलो में है नाकि हमारे कदमो के नीचे ......
आप इस प्रयास में हिस्सा ले या न ले पर इतना निवेदन जरुर है : अगर आपको पैदल चलते समय कोई कागज , अख़बार जिस पर कोई ईश्वरीय प्रतिमा हो उसपर कदम न रखे और उसे उठा कर किसी कोने में रख दे......धन्यवाद्
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